आज का नया भारत जाग उठा है वह पूरी शक्ति के साथ विश्व में अपनी पहचान बना रहा है। देश का राजनैतिक नेतृत्व इतना सक्षम है कि विश्व के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अपने देश में बुलाकर उन्हें अपनी संस्कृति और विश्वकल्याण की अवधारणा से अवगत करवा सके। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जो अभूतपूर्व दृढ़ता और समझबूझ का परिचय दिया है उससे विश्व पटल पर भारत के प्रति नजरिया भी बदल है। भारत का पाकिस्तान और चीन के प्रति कड़ा रुख साफ करता है कि आतंकवाद और बातचीत साथ साथ नहीं चल सकते। डोकलाम और लद्दाख क्षेत्र में हुए संघर्ष ने चीन को भी अपनी रणनीति में बदलाव लाने पर मजबूर कर दिया है। चीन का हाल यहाँ तक खराब हो चुका है कि वहां का नेतृत्व जिनपिंग की क्षमताओं पर गंभीर हो गया है जिससे जिनपिंग की चिंता बढ़ चुकी है । आज जब यह विमर्श पूरे विश्व के सामने है तो भारत के सम्मान में उनका साथ आना भारत को और भी मजबूत बनाने में सिद्ध होगा।

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